- अलंकार किसे कहते हैं ? या अलंकार की परिभाषा दिजिए ? या अलंकार क्या हैं ? या अलंकार का अर्थ क्या हैं ?
उत्तर - काव्य की सोभा बढ़ाने वाले तत्वों को अलंकार कहते हैं ।
या
अलंकार का शाब्दिक अर्थ हैं आभूषण । जिस प्रकार आभूषण से शरीर की शोभा बढ़ती है, उसी प्रकार अलंकार से काव्य की शोभा बढ़ती हैं ।
2. अलंकार के कितने प्रकार / भाग / अंग / भेद हैं ?
उत्तर - अलंकार को दो भागों में बांटा गया हैं ।
शब्दालंकार (शब्द अलंकार) और अर्थालंकार (अर्थ अलंकार )
3. शब्दालंकार (शब्द अलंकार) किसे कहते हैं ?
उत्तर - जहाँ शब्दों के कारण / व्दारा काव्य में चमत्कार उत्पन्न होता हैं, वहाँ शब्दालंकार होता हैं ।
4. अर्थालंकार (अर्थ अलंकार) किसे कहते हैं ?
उत्तर - जहाँ अर्थो के कारण / व्दारा काव्य में चमत्कार उत्पन्न होता हैं, वहाँ अर्थालंकार होता हैं ।
5. शब्दालंकार (शब्द अलंकार) के भेद / भाग / अंग / प्रकार हैं ?
उत्तर - अनुप्रास अलंकार , यमक अलंकार , श्लेष अलंकार, बक्रोक्ति अलंकार
6. अनुप्रास अलंकार किसे कहते हैं ?
उत्तर - जहाँ काव्य में एक ही वर्ण की आवृत्ति एक से अधिक बार एक ही क्रम में होता हैं, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता हैं ।
या
जिस रचना में वर्णो की आवृत्ति एक से अधिक बार होता हैं, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता हैं ।
उदाहरण - रघुपति राघव राजा राम ।
यहाँ र वर्ण की आवृत्ति एक से अधिक बार हुई हैं अत: अनुप्रास अलंकार हैं ।
उदाहरण - कायर कूर कपूत कुचली यू ही मर जाती हैं ।
यहाँ क वर्ण की आवृत्ति एक से अधिक बार हुई हैं अत: अनुप्रास अलंकार हैं ।
7. यमक अलंकार किसे कहते हैं ?
उत्तर - जहाँ काव्य में एक ही शब्द की बार – बार या एक से अधिक बार आवृत्ति एक ही क्रम में हो, परन्तु उसका अर्थ भिन्न – भिन्न / अलग – अलग होता हैं, वहाँ यमक अलंकार होता हैं ।
उदाहरण - कनक – कनक ते सौगुनी मादकता अधिकाय ।
या खाए बौराय जग, वा पाए बौराए ॥
यहाँ पहले कनक का अर्थ सोना (स्वर्ण) तथा दूसरा कनक का अर्थ धतूरा हैं । अत: यमक अलंकार हैं ।
8. श्लेष अलंकार किसे कहते हैं ?
उत्तर - जहाँ काव्य में एक ही शब्द के व्दारा एक से अधिक अर्थ ध्वनित होता हो, वँहा श्लेष अलंकार होता हैं ।
या
उत्तर - जहाँ काव्य में एक ही शब्द के एक से अधिक अर्थ जुरे हुए हो, वहाँ श्लेष अलंकार होता हैं ।
उदाहरण - रहीमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून ।
यहाँ पानी शब्द के तीन अर्थ हैं इज्जत, मान, प्रतिष्ठा । अत: यमक अलंकार हैं ।
9. बक्रोक्ति अलंकार किसे कहते हैं ?
10. अर्थालंकार (अर्थ अलंकार) के भेद / भाग / अंग / प्रकार हैं ?
उत्तर - उपमा अलंकार, रूपक अलंकार, उत्प्रेक्षा अलंकार, अतिशयोक्ति अलंकार, बक्रोक्ति अलंकार, बिरोधाभास अलंकार ।
11. उपमा अलंकार किसे कहते हैं ?
उत्तर - जहाँ काव्य में उपमेय की उपमान के साथ किसी सामानधर्म को लेकर तुलना की जाती हैं, वहाँ उपमा अलंकार होता हैं ।
या
जहाँ काव्य में दो वस्तुओं में सामानधर्म को लेकर तुलना की जाती हैं, वहाँ उपमा अलंकार होता हैं ।
उपमा अलंकार के चार अंग हैं –
I. उपमेय – जिसकी तुलना की जाती हैं ।
II. उपमान – जिससे तुलना की जाती हैं ।
III. सामानधर्म - जिसके आधार पर की जाती हैं ।
IV. वाचक शब्द – सा, सी, जैसा ईत्यादि ।
उदाहरण - मुख चाँद सा सुन्दर हैं ।
यहाँ मुख उपमेय है तथा चाँद उपमान है ।
सा वाचक तथा सुन्दर धर्म है । अत: उपमा अलंकार हैं ।
12. रूपक अलंकार किसे कहते हैं ?
उत्तर - जहाँ उपमेय (प्रस्तुत) में उपमान (अप्रस्तुत) का निषेध रहित आरोप रहता हैं, वहाँ रूपक अलंकार होता हैं ।
या
जहाँ काव्य में उपमेय (प्रस्तुत) का उपमान (अप्रस्तुत) के साथ अभेद दिखाया जाता हैं, वहाँ रूपक अलंकार होता हैं ।
1 उदाहरण - चरण कमल बन्दौ हरि राई ।
यहाँ प्रभो के चरण को कमल का आरोप हैं । अत: रूपक अलंकार हैं ।
2 उदाहरण - बीती वभावरी जाग री ।
अम्बर-हनघट में डुबो रही तारा-घट ऊषा-नागरी ॥
यहाँ अम्बर, तारा और ऊषा (उपमान) पर क्रमश: पनघट, घट और नागरी (उपमान) का आरोप हैं । अत: रूपक अलंकार हैं ।
13. उत्प्रेक्षा अलंकार किसे कहते हैं ?
उत्तर – जहाँ काव्य में उपमेय में उपमान की सम्भावना व्यक्त की जाए, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता हैं । इस अलंकार में वाचक शब्दों के रुप में मानो, जानो, मानहुँ, ज्योदी, त्यौही, ज्यों आदि का प्रयोग किया जाता हैं ।
या
जहाँ काव्य में उपमेय (प्रस्तुत) में उपमान (अप्रस्तुत) की सम्भावना की जाती हैं, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता हैं । इस अलंकार में वाचक शब्दों के रुप में मानो, जानो, मानहुँ, ज्योदी, त्यौही, ज्यों आदि का प्रयोग किया जाता हैं ।
1 उदाहरण - नील परिधान बीच सु कुमार, खुल रहा मृदुल अधखुला अगं ।
खोला हो ज्यों बिजली का फुल, मेघव, बीच गुलावी रंग ॥
2 उदाहरण - फूले कास सकल महि छाई ।
जनु बरसा रितु प्रकट बुढ़ाई ॥
14. बिरोधाभास अलंकार किसे कहते हैं ?
उत्तर – जहाँ विरोध न होते हुए भी विरोध का आभास किया जाए, वहाँ बिरोधाभास अलंकार होता हैं ।
या
जहाँ दो वस्तुओ में मुलत: विरोध न होने पर भी विरोध का आभास का वर्णन किया जाता हैं । वहाँ बिरोधाभास अलंकार होता हैं ।
उदाहरण - या अनुरागी चित्त की, गति समुझे नही कोय ।
ज्यों – ज्यों बाढ़े श्याम रंग, त्यौं – त्यौं उज्ज्वल होय ॥
15. अतिशयोक्ति अलंकार किसे कहते हैं ?
उत्तर - जहाँ काव्य में किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थान के गुण–दोष को अत्याधिक बढ़ा–चढ़ाकर वर्णन किया जाता हैं, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता हैं ।
या
जहाँ काव्य में किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थान का वर्णन अत्याधिक बढ़ा–चढ़ाकर किया जाए हैं, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता हैं ।
उदाहरण - “नित – प्रति पून्यौ रहौ वा के चहुँ पास” ॥